Tuesday, October 21, 2008

इतनी लंबी कभी नही थी

इतनी लंबी कभी नही थी.....
इतनी लंबी कभी नही थी ,अपनी ये जुदाई.....

बेचैनी तडपाए मुजे
बेचैनी तडपाए मुजे, काटें ये तनहाई....

उस पल जब तुजे दिल दिया....
उस पल जब तुजे दिल दिया, धेर बड़ा मैने था किया....
शायद नाथा पहले जुड़े,
तेरे संग बीते और कुछ दिन, और प्यार बड़ा तो दिया....

याद हैं वो हर लम्हा मुजे
याद हैं वो हर लम्हा मुजे,जो तूने ये एहसास दिया...
इश्क़ तेरे संग हैं मीटा,
वम की ज़हर, अब देके सज़ा, आँखें क्यूँ तू बंद किया???

कदम अकेले ना चले थे.....
कदम अकेले ना चले थे.....कैसे सफ़र ये चले मेरा....??
टूट पड़ी हूँ में तो आज,तेरे संग जिया हैं मेरा चला....

इतनी लंबी कभी नही थी.....
इतनी लंबी कभी नही थी अपनी ये जुदाई.....

बेचैनी तडपाए मूज़े
बेचैनी तडपाए मूज़े, कांटें ये तनहाई....

5 comments:

sangeetha said...

hey the feeling and emotions of this poem is amazing! too good kano

Rohit Khetarpal said...

For whom these emotions and feelings are for:-)?

Rohit Khetarpal said...

For whom these feelings and emotions are for....:-)?

Vishwadeep said...

Nice expressions..!!!
lil mistakes in wordings.. bt chalega... :)

Deepak said...

wow.. gud to see you this.
yaar aapki hindi to mast ho gayi h:)

really nice!!!

Keep it up:)